जमीयत उलमा ज़िला बहराइच की जानिब से हज प्रशिक्षण व टीकाकरण कैम्प का हुआ आयोजन……
अब्दुल अज़ीज़
बहराइच : (NNI 24) जामिया अरबिया मसऊदिया नूरुल उलूम क़ाज़ीपुरा शहर बहराइच में एक रोज़ा हज प्रशिक्षण व टीकाकरण कैम्प का आयोजन किया गया। जिसकी शुरुआत जामिया के उस्ताज़ मौलाना क़ारी अब्दुल मतीन क़ासमी की तिलावत मौलाना मुहम्मद साअद अख़्तर क़ासमी व सुब्हानुल हक़ की हम्द व नात पाक से हुआ। जब कि निज़ामत के फ्राइज़ जामिया के उस्ताज़ मौलाना मुफ़्ती सुफ़ियान अहमद क़ासमी ने अंजाम दिए। प्रशिक्षण कैम्प में डेढ़ सौ से ज़्यादा लोगों ने शिरकत की और डॉ. आफ़ाक़ अहमद और उन की पूरी टीम ने आए हुए बावन हाजियों को टीका लगाया और पोलियो की दवा पिलाई।
इस मौक़े पर जामिया नूरुल उलूम के प्रधानाध्यापक मौलाना मुहम्मद इनायतुल्लाह क़ासमी ने तआरुफ़ी ख़िताब में हाजियों को मुबारकबाद देते हुए फ़रमाया आप हज़रात इस मुबारक सफ़र पर रवाना हो रहे हैं जहां हर कस व नाकस की रसाई नहीं होती, बल्कि वह ख़ुशनसीब अफ़राद जाते हैं जिन्हें अल्लाह तबारक व तआला बुलाते हैं, उन्होंने अफ़सोस का इज़हार करते हुए कहा कि पहले ज़िला बहराइच के हाजियों की तादाद 800 से मुतजाविज़ होती थी जबकि अब सिर्फ़ ढाई सौ रह गई है लिहाज़ा हज की अदायगी के साथ साथ हज की तरगीब भी देते रहना चाहिए।
मौलाना क़ारी ज़ुबैर अहमद क़ासमी प्रबन्धक जामिया व ज़िला अध्यक्ष जमीयत उलमा ज़िला बहराइच ने अपने ख़िताब में फ़रमाया कि वहाँ पर तमाम अरकान अदा करने के लिए उस का समझना भी बे इंतिहा ज़रूरी है, जिससे कि आप की हाज़िरी कारआमद हो, एहराम बांधना, तवाफ़ करना, सफा व मर्वा की सई करना, बाल मुंडवाना जैसे अहम मसाइल से आप वाकिफ़ होंगे तो आप को हज के अरकान अदा करने में आसानी होगी, क़ारी साहब ने कहा कि हाजी रौज़ा ए अतहर के मोअजहा में होकर जब सलात व सलाम पेश करता है तो नबी करीम ब नफ्से नफ़ीस सलात व सलाम का जवाब देते हैं।
मौलाना मुफ़्ती इश्तियाक़ अहमद क़ासमी शेखुल हदीस जामिया नूरुल उलूम ने मसाइल हज को वज़ाहत से बयान करते हुए फ़रमाया कि हज की तीन क़िसमें हैं, क़िरान, तमत्तो और इफ़राद लेकिन हाजियों के लिए हज तमत्तो में ज़्यादा सहूलियत और आसानी है, मुफ़्ती साहब ने मर्दों और औरतों के हज के मसाइल को वज़ाहत के साथ बयान फ़रमाया। हज हाउस मुंबई से ब-हैसियत ट्रेनर तशरीफ़ लाने वाले जनाब मास्टर एहसानुर्रहमान ने ज़रूरी काग़ज़ात के हवाले से रहनुमाई फ़रमाई और कहा कि हज की अदायगी में मुअल्लिम का तआवुन ज़रूर फ़रमाएं और उसकी रहनुमाई में हज अदा करें ताकि आसानी हो।
मौलाना मुफ़्ती अब्दुल वहीद क़ासमी उस्ताज़ जामिया नूरुल उलूम ने फ़रमाया कि अल्लाह ने ख़ान-ए-काबा को सबसे अफ़ज़ल और अशरफ़ बनाया है। हज व उमरा ऐसी इबादत है जो वहाँ पर अदा हो सकती है दुनिया के किसी कोने में अदा नहीं हो सकती, अल्लाह तआला ने ख़ान-ए-काबा की बरकत से हमेशा दुश्मनों से अहले मक्का को महफ़ूज़ रखा, अबरहा ने हमला करने की कोशिश की थी तो अल्लाह ने उसको तहब व बरबाद कर दिया, जो लोग भी जा रहे हैं वह अपने दिल में उस की अज़मत व एहतिराम को पैदा करें और जो वहाँ के उसूल व आदाब हैं उस की रियायत करते हुए अपने फ़रीज़े को अंजाम दें। मौलाना अमीर अहमद क़ासमी नायब नाज़िम तालीमात जामिया नूरुल उलूम ने तरीक़ा एहराम तवाफ़ व सई की अमली मश्क़ करके लोगों को समझाया। मौलाना क़ारी ज़ुबैर अहमद क़ासमी की दुआ पर मजलिस ख़त्म हुई।
आख़िर में जामिया के कार्यवाहक प्रबन्धक हाफ़िज़ मुहम्मद सईद अख़्तर नूरी ने प्रशिक्षण कैम्प में शिरकत करने पर शुक्रिया अदा करते हुए फ़रमाया कि आप हज़रात ख़ुशनसीब हैं कि अल्लाह तआला ने आप को अपने घर की ज़ियारत के लिए क़ुबूल फ़रमाया।
इस मौके पर मौलाना अबुल कलाम क़ासमी, मौलाना मुहम्मद हारून क़ासमी, मौलाना मुहम्मद कलीम नदवी, हाजी क़मर अहमद, मौलाना जसीम अहमद क़ासमी, हाफ़िज़ मुहम्मद फ़िरोज़ नूरी, हाफ़िज़ हयातुल्लाह नूरी, मौलाना वसीउल्लाह क़ासमी, मौलाना मुहम्मद सालिम हयातुल्लाह नूरी, हाफ़िज़ मुहम्मद ज़ाकिर, हाफ़िज़ मुहम्मद मीकाईल नूरी, मौलाना मुहम्मद अहमद नूरी, हाफ़िज़ तक़ीउद्दीन नूरी के अलावा कसीर तादाद में उलमा और अवाम मौजूद रहे।

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