जमीयत उलमा बहराइच के तत्वावधान में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला एवं स्थानीय परामर्श बैठक हुईं आयोजित……

जमीयत उलमा बहराइच के तत्वावधान में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला एवं स्थानीय परामर्श बैठक हुईं आयोजित……

बहराइच : (NNI 24) जमीयत उलमा बहराइच के तत्वावधान में जामिया अरबिया मसऊदिया नूरुल उलूम बहराइच के सलामत हॉल में ज़िला एवं स्थानीय पदाधिकारियों तथा सदस्यों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला और स्थानीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। दो सत्रों पर आधारित इस कार्यक्रम में संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण, दीनी एवं सामाजिक सेवाओं, समाज सुधार, नेतृत्व निर्माण तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण, मौलाना क़ारी ज़िया-उल-हक़ क़ासमी द्वारा पवित्र क़ुरआन के पाठ तथा मौलाना साअद अख़्तर क़ासमी एवं अबू उबैदा द्वारा नात-ए-रसूल ﷺ की प्रस्तुति से हुआ। प्रथम सत्र की अध्यक्षता जमीयत उलमा बहराइच के अध्यक्ष मौलाना क़ारी ज़ुबैर अहमद क़ासमी ने की, जबकि महासचिव मौलाना मुहम्मद इनायतुल्लाह क़ासमी ने पिछली बैठक की कार्यवाही प्रस्तुत की, जिसका उपस्थित सदस्यों ने अनुमोदन किया।

कार्यशाला के प्रथम चरण में दीनी तालीमी बोर्ड, इस्लाह-ए-मुआशरा (समाज सुधार), GEM (जेम), आदर्श मस्जिद, जन विकास एवं मॉडल विलेज तथा इस्लाह-ए-नीयत व तज़किया-ए-नफ़्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतीकरण दिए।

दीनी तालीमी बोर्ड के संबंध में मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद सलमान क़ासमी सीतापुरी ने बोर्ड की उपयोगिता तथा मदरसों के पंजीकरण संबंधी जानकारी दी। जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश के सचिव हाफ़िज़ मुहम्मद सईद अख़्तर नूरी ने आवश्यक संगठनात्मक निर्देश दिए। समाज सुधार विषय पर मौलाना मुफ़्ती अब्दुल वहीद क़ासमी ने सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन तथा सुधारात्मक गतिविधियों को प्रभावी बनाने पर बल दिया।

“मिसाली मस्जिद” विषय पर मौलाना मुफ़्ती सुफ़ियान अहमद क़ासमी ने मस्जिदों को धार्मिक, शैक्षिक एवं सामाजिक सेवाओं का सक्रिय केंद्र बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, जबकि “जन विकास एवं मॉडल विलेज” विषय पर मौलाना अब्दुल हक़ लखीमपुर-खीरी ने ग्रामीण विकास एवं जनकल्याण योजनाओं का विस्तृत परिचय कराया।

“इस्लाह-ए-नीयत व तज़किया-ए-नफ़्स” विषय पर मौलाना मुफ़्ती इकरामुद्दीन क़ासमी ने निष्ठा एवं तक़वा के महत्व को स्पष्ट किया, जबकि मौलाना सलाहुद्दीन मज़ाहिरी ने आत्मिक एवं सुधारात्मक पहलुओं पर प्रेरक संबोधन दिया।

प्रथम सत्र के अध्यक्षीय संबोधन में मौलाना क़ारी ज़ुबैर अहमद क़ासमी ने कहा कि सफलता केवल कार्य करने से नहीं, बल्कि निरंतरता, दृढ़ता और सतत प्रयास से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि जमीयत के अकाबिर ने हर दौर में विपरीत परिस्थितियों का धैर्यपूर्वक सामना किया और अपने इख़लास एवं इस्तिक़ामत के बल पर मिल्लत का मार्गदर्शन किया। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से संगठनात्मक दायित्वों को ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण के साथ निभाने का आह्वान किया।

दोपहर के भोजन एवं नमाज़ के बाद अपराह्न तीन बजे द्वितीय सत्र जमीयत उलमा बहराइच के उपाध्यक्ष मौलाना मुफ़्ती इश्तियाक़ अहमद क़ासमी की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। इस सत्र में संगठनात्मक कार्यों, सामाजिक सद्भाव और नेतृत्व निर्माण से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतियाँ दी गईं।

“सद्भावना” विषय पर मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद सलमान क़ासमी सीतापुरी ने शांति, भाईचारा एवं पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया, जबकि मौलाना मुफ़्ती सुहैब अहमद क़ासमी ने इस संबंध में व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए।

“नाज़िम-ए-तंज़ीम” की जिम्मेदारियों पर भी मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद सलमान क़ासमी सीतापुरी ने विस्तृत मार्गदर्शन दिया। “रफ़ीक़” विषय पर हाफ़िज़ मुहम्मद अतीक़ ने संगठनात्मक सहयोग एवं कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला, जबकि मुफ़्ती मुहम्मद अख़्लाक़ ख़ान क़ासमी ने नेतृत्व के गुण, योजनाबद्ध कार्यप्रणाली तथा वार्षिक संगठनात्मक कैलेंडर पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

दूसरे सत्र में स्थानीय इकाइयों के पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी कार्य-रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा भविष्य की योजनाओं से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया।

समापन अध्यक्षीय संबोधन में मौलाना मुफ़्ती इश्तियाक़ अहमद क़ासमी ने कहा कि इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाएँ संगठनात्मक क्षमताओं को विकसित करने तथा जमीयत के संदेश को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने क़ाएद-ए-मिल्लत हज़रत मौलाना सैयद महमूद असअद मदनी की संगठनात्मक दूरदर्शिता का उल्लेख करते हुए कहा कि अकाबिर-ए-जमीयत की इच्छा है कि संगठन की प्रत्येक इकाई पूर्ण सक्रियता के साथ कार्य करे, ताकि दीनी, मिल्ली एवं सामाजिक सेवाएँ अधिक प्रभावी रूप से संपन्न हो सकें।
उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि कार्यशाला में प्राप्त मार्गदर्शन को व्यवहारिक जीवन में लागू करें तथा जनसेवा को अपना प्रमुख उद्देश्य बनाएँ।
कार्यशाला का समापन मौलाना मुफ़्ती इश्तियाक़ अहमद क़ासमी की दुआ पर हुआ। कार्यक्रम में जनपद भर के ज़िला एवं स्थानीय पदाधिकारियों, सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया तथा संगठनात्मक एवं सुधारात्मक गतिविधियों को और अधिक सक्रिय बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन मौलाना मुहम्मद इनायतुल्लाह क़ासमी ने किया।

कार्यशाला में विशेष रूप से मौलाना मोहम्मद अमीर क़ासमी, मौलाना मुहम्मद ख़ालिद क़ासमी, मौलाना मुफ़्ती अब्दुल मतीन क़ासमी, मौलाना मुहम्मद सईद क़ासमी, हाजी क़मर अहमद, मौलाना मुहम्मद हारून क़ासमी, मौलाना डॉ. अब्दुल हन्नान क़ासमी, मौलाना डॉ. महबूब अहमद क़ासमी, मौलाना इसरारुल हक़ क़ासमी, क़ारी अब्दुस्समद, मौलाना इसरार अहमद क़ासमी, निज़ामुद्दीन ख़ाँ, मौलाना रियाज़ अहमद क़ासमी, हाजी नूर अहमद, मौलाना सईदुर्रहमान क़ासमी, क़ारी निहालुद्दीन, बरकतुल्लाह ख़ाँ, मौलाना अबुल कलाम क़ासमी, मौलाना मोहम्मद कलीम नदवी, अब्दुल क़य्यूम मकरानी, हाफ़िज़ मुख़्तार अहमद नूरी, मौलाना अलीमुद्दीन क़ासमी, क़ारी महफ़ूज़ अहमद नूरी, हाफ़िज़ हयातुल्लाह नूरी, क़ारी क़मरुद्दीन, मौलाना अख़्लाक़ अहमद क़ासमी, मौलाना ताज मुहम्मद क़ासमी, मौलाना मुहम्मद इलियास क़ासमी, मौलाना मुहम्मद फ़ारूक़ क़ासमी, मौलाना वक़ार अहमद क़ासमी, हाफ़िज़ मुहम्मद मीकाईल नूरी, मौलाना मुफ्ती मोहम्मद असलम क़ासमी, मौलाना मुहम्मद फ़ुरक़ान क़ासमी, हाफ़िज़ अब्दुल बारी नूरी, मौलाना ज़ैनुल आबिदीन क़ासमी, मौलाना वसीउल्लाह क़ासमी, मौलाना सालिम हयातुल्लाह नूरी, मौलाना मुहम्मद सिद्दीक़ अख़्तर नूरी, क़ारी शकील अहमद, मौलाना अब्दुर्रक़ीब क़ासमी, हाफ़िज़ मुहम्मद अशरफ़ नूरी, मुहम्मद मुशाहिद ख़ाँ, मौलाना मुहम्मद इस्हाक़ नूरी, मौलाना अज़ीज़ुद्दीन क़ासमी, मौलाना मुहम्मद तैय्यब क़ासमी, मौलाना अब्दुर्रहमान क़ासमी, मौलाना मुहम्मद ज़ैद क़ासमी, हाफ़िज़ इस्लामुद्दीन, मौलाना मुहम्मद अहमद क़ासमी, हाजी मुहम्मद शरीफ़, हाफ़िज़ मेराजुल हक़, हाफ़िज़ मुहम्मद हनीफ़ नूरी, मौलाना हाफ़िज़ इफ़्तिख़ार अहमद बेग मज़ाहिरी, मौलाना मुफ़्ती महमूदुल हसन क़ासमी, मौलाना महमूद हसन क़ासमी, मौलाना हफ़ीज़ुल्लाह, मौलाना अनवर अहमद क़ासमी, क़ारी अमीरुल हसन नूरी, मौलाना मुहम्मद इलियास क़ासमी, मौलाना जसीम अहमद क़ासमी, मौलाना नूर अहमद नदवी, हाफ़िज़ लईक़ अहमद, हाफ़िज़ शरीफ़ुद्दीन, मौलाना आफ़ाक़ अहमद बेग, मौलाना फ़ख़रुद्दीन साक़िबी, क़ारी मुहम्मद एहसान फ़ुरक़ानी, नफ़ीस ख़ाँ, मौलाना उबैदुर्रहमान बेग क़ासमी, हाजी मुहम्मद अमीन बेग, मौलाना डॉ. मुहम्मद सलीम क़ासमी, मुहम्मद शुऐब, हाफ़िज़ मुहम्मद राशिद, हाफ़िज़ अबू हुरैरा मुहम्मदी, क़ारी मुहम्मद उसामा नूरी, मौलाना मुहम्मद साजिद, मौलाना अब्दुल वाहिद क़ासमी, मौलाना इनामुल हक़ क़ासमी, मौलाना मुफ़्ती ज़िया-उल-हक़ क़ासमी, हाफ़िज़ अब्दुल लतीफ़, हाफ़िज़ ग़यासुद्दीन, मौलाना अहरारुल हक़ तथा क़ारी क़ासिम हयातुल्लाह नूरी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *