जमीयत उलमा शहर बहराइच की मजलिस-ए-मुंतज़िमा की बैठक सम्पन्न, मकातिब व मदरसों के संरक्षण, सीरतुन्नबी ﷺ कार्यक्रम तथा दुरूस-ए-कुरआन व हदीस शुरू करने का हुआ निर्णय******
बहराइच : (NNI 24) जमीयत उलमा शहर बहराइच की मजलिस-ए-मुंतज़िमा की बैठक सोमवार, 13 जुलाई 2026 को बाद नमाज़-ए-मग़रिब गोल मस्जिद, चौक बाज़ार, बहराइच में जमीयत उलमा शहर बहराइच के अध्यक्ष मौलाना अबुल कलाम क़ासमी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक की शुरुआत मौलाना क़ारी ज़ियाउल हक़ क़ासमी (उस्ताज़, जामिया नूरुल उलूम बहराइच) की तिलावत-ए-कुरआन से हुई, जबकि जामिया नूरुल उलूम के छात्र अबू उबैदा ने नात-ए-रसूल-ए-मक़बूल ﷺ पेश करने का सौभाग्य प्राप्त किया। इसके बाद मौलाना मोहम्मद कलीम नदवी महासचिव जमीयत उलमा शहर बहराइच ने पिछली बैठक की कार्यवाही पढ़कर सुनाई, जिसकी सदस्यों ने सर्वसम्मति से पुष्टि की।
बैठक को संबोधित करते हुए जमीयत उलमा ज़िला बहराइच के अध्यक्ष मौलाना क़ारी ज़ुबैर अहमद क़ासमी ने कहा कि इस्लाम विरोधी शक्तियाँ हमेशा से मदरसों और दीनी संस्थाओं को कमज़ोर करने की कोशिश करती रही हैं, क्योंकि यही संस्थाएँ दीन-ए-इस्लाम के मज़बूत क़िले हैं। उन्होंने कहा कि मकातिब-ए-इस्लामिया मदरसों की बुनियाद और नर्सरी हैं, इसलिए उनके संरक्षण, सुदृढ़ीकरण और विस्तार के लिए हर संभव प्रयास करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
हाफ़िज़ मोहम्मद सईद अख्तर नूरी सचिव जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश ने अपने संबोधन में कहा कि जमीयत उलमा की रचनात्मक सेवाएँ उम्मत की दीनी और सामाजिक भलाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे संगठित रूप से जमीयत के रचनात्मक कार्यक्रमों, विशेष रूप से “दीनी तालीमी बोर्ड” की गतिविधियों का विस्तार करें, प्रत्येक मस्जिद में पूर्णकालिक या अंशकालिक मकतब स्थापित करने का प्रयास करें, वयस्क शिक्षा के हल्के शुरू करें तथा महिलाओं की दीनी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के लिए नियमित और प्रभावी कार्यक्रम आयोजित करें।
बैठक में माह-ए-रबीउल अव्वल के दौरान सीरतुन्नबी ﷺ के कार्यक्रम आयोजित करने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया और शहर के पाँचों हल्कों में कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
इसी प्रकार शहर की सभी मस्जिदों में दुरूस-ए-कुरआन व हदीस को बढ़ावा देने के लिए यह निर्णय लिया गया कि जहाँ पहले से दर्स का सिलसिला चल रहा है या किसी कारणवश बंद हो गया है, वहाँ उसे पुनः व्यवस्थित रूप से शुरू किया जाए तथा जिन मस्जिदों में अभी तक दर्स नहीं हो रहा है, वहाँ शीघ्र शुरू कराने का प्रयास किया जाए।
बैठक में मौलाना मोहम्मद इनायतुल्लाह क़ासमी महासचिव जमीयत उलमा ज़िला बहराइच, मौलाना मोहम्मद अमीर क़ासमी सचिव जमीयत उलमा ज़िला बहराइच, मौलाना मुफ़्ती इकरामुद्दीन क़ासमी, मौलाना मुफ़्ती अब्दुल वहीद क़ासमी उपाध्यक्ष जमीयत उलमा शहर बहराइच, हाजी क़मर अहमद सचिव जमीयत उलमा शहर बहराइच, मौलाना अलीमुद्दीन क़ासमी सचिव जमीयत उलमा शहर बहराइच, मौलाना मुफ़्ती सुफ़ियान अहमद क़ासमी सचिव जमीयत उलमा शहर बहराइच, मौलाना वसीउल्लाह क़ासमी सचिव जमीयत उलमा शहर बहराइच, मौलाना सालिम हयातुल्लाह नूरी सचिव जमीयत उलमा शहर बहराइच, मौलाना मोहम्मद तैय्यब क़ासमी, मास्टर अब्दुल ख़ालिक़, मौलाना अब्दुर्रहमान क़ासमी, हाफ़िज़ मुख़्तार अहमद नूरी, मौलाना मोहम्मद इस्हाक़ नूरी, मौलाना इरशाद अहमद साक़िबी, मौलाना नज़र मोहम्मद क़ासमी, मौलाना अब्दुर्रक़ीब क़ासमी, मौलाना मोहम्मद ज़ैद क़ासमी, मौलाना क़ारी अब्दुल मतीन क़ासमी, मास्टर मोहम्मद आरिफ़, क़ारी अमीरुल हसन नूरी, क़ारी मेराज अहमद, इकराम अहमद पप्पू, आरिफ़ अली, हाफ़िज़ मोहम्मद अशरफ़ नूरी, मोहम्मद हुज़ैफ़ा, हाफ़िज़ मोहम्मद आमिर, हाजी ज़ुबैर मोहम्मद, क़ारी महफ़ूज़ अहमद नूरी, मुफ़्ती मोहम्मद अहमद नूरी, हाफ़िज़ मोहम्मद हनीफ़ नूरी, हाजी नूर अहमद, अब्दुल क़य्यूम मेकरानी, मोहम्मद इरशाद, हाजी कल्लू, हाफ़िज़ हयातुल्लाह नूरी, अली अहमद ख़ां, मौलाना महफ़ूज़ अहमद मज़ाहिरी, हाफ़िज़ इकराम अहमद, हाफ़िज़ अनवर अली, हाजी इक़बाल अहमद आढ़ती, अब्दुल हसीब ख़ान सोनू, क़ारी निहालुद्दीन, मुफ़्ती मोहम्मद आदिल क़ासमी, मौलाना इफ्तिख़ार अहमद बेग मज़ाहिरी, मौलाना मोहम्मद आज़म नूरी, हाफ़िज़ तक़ीयुद्दीन नूरी, मुफ़्ती मोहम्मद असलम क़ासमी, मौलाना ओवैस अहमद क़ासमी, हाजी नसीम अहमद, हाफ़िज़ मोहम्मद अनस, मौलाना अनवार अहमद क़ासमी, मुफ़्ती मोहम्मद तल्हा मुख़्तार साक़िबी, जुनैद अहमद सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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